Pannkaj Kattaria Sunderkand path singer haryana delhi ncr pankaj kataria bhajan 4 अर्थ सहित सुंदरकांड पाठ पंकज कटारिया

 


सुन्दरकाण्ड पाठ का बिगड़ता स्वरूप — मनोरंजन या भक्ति ?

 

आज के समय में सुन्दरकाण्ड की बुकिंग के बाद अक्सर एक ही बात सुनने को मिलती है — “पंडित जी, अच्छे से करना, माहौल बन जाना चाहिए, मज़ा आ जाए एकदम ।” लोग बताते हैं कि वे पहले किसी और मंडली को बुलाते थे, लेकिन इस बार कुछ “अलग” और “जोशीला” अनुभव चाहते हैं ।
यह सुनकर सोचने पर मजबूर होना पड़ता है — क्या सुन्दरकाण्ड जैसी गहन, आध्यात्मिक हनुमान-कथा अब केवल एक “इवेंट” बनकर रह गई है ? लोग चौपाइयों के अर्थ और भाव में डूबना नहीं चाहते, बल्कि उन्हें चाहिए तड़कता-भड़कता संगीत और एक उत्सव जैसा माहौल ।


संस्कृति बचाने की बात और हमारा दोहरा रवैया

 

हम सभी बड़े गर्व से कहते हैं कि अपनी संस्कृति बचानी है, सनातन परंपरा बचानी है — लेकिन सवाल यह है कि जब हम हर पवित्र अनुष्ठान को मनोरंजन में बदल देंगे, तो संस्कृति बचेगी कैसे ? परंपरा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उसके मूल भाव को समझने और जीने से बचती है ।
सुन्दरकाण्ड पाठ कोई सामान्य कथा नहीं है। यह अत्यंत सामर्थ्यशाली, ऊर्जा-प्रदायक, प्रेरणादायक और जीवन-प्रबंधन के गूढ़ सूत्रों से भरा एक अमूल्य आध्यात्मिक साधन है । पर जब हम इसी पाठ को महज़ रस्म या दिखावे की तरह करवाते हैं, तो इसका वास्तविक फल हमें मिल ही नहीं पाता — क्योंकि भाव सुन्दरकाण्ड के प्रति नहीं, सिर्फ ताल और थिरकन पर केंद्रित रहता है ।


अर्थ सहित पाठ ही असली अनुभव है

 

यहीं पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है — सुन्दरकाण्ड को सही तरीके से अनुभव कैसे किया जाए ? जवाब है — जब हर चौपाई को सिर्फ गाया न जाए, बल्कि उसका सरल भाषा में अर्थ भी समझाया जाए । जब श्रोता को पता चलता है कि कौन सी चौपाई जीवन में किस समस्या का समाधान देती है, संकट में धैर्य कैसे रखा जाए, या बाधाओं से कैसे लड़ा जाए — तब पाठ सिर्फ सुनना नहीं रहता, एक अनुभव बन जाता है । अर्थ सहित संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ की यही ताकत है — यह भक्ति और ज्ञान दोनों को साथ लेकर चलता है, ताकि श्रोता केवल भावुक न हो बल्कि समझदार भी बने । यही कारण है कि हनुमंत कृपा पात्र – पंकज कटारिया जी द्वारा प्रस्तुत अर्थ सहित संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ इतना सराहा जाता है — जहाँ भक्ति के साथ ज्ञान भी साथ चलता है ।

जैसा कि उनके एक श्रोता ने अपने अनुभव में बताया :

“Pannkaj Ji ne hamare Griha Pravesh pe bahut hi sundar सुंदरकांड पाठ किया, har chaupai ka अर्थ musically samjhaya aur hamein to bahut hi aanand aaya ।”
Rajesh Sharma, Sector 21, Faridabad


गुटखा, चाय और शरबत — पाठ के बीच यह विकृति क्यों ?

 

आश्चर्य तब और बढ़ जाता है जब लोग मुंह में गुटखा भरकर, बीच-बीच में चाय-शरबत की चुस्कियां लेकर पाठ करते हैं । इसमें सबसे बड़े सहयोगी बनते हैं आयोजक स्वयं, जो उत्सव की तरह बीच-बीच में शरबत-चाय परोसते रहते हैं । और उतनी ही ज़िम्मेदार वे मंडलियां भी हैं जो इस विकृति को रोकने के बजाय बढ़ावा देती हैं ।


सुन्दरकाण्ड की मर्यादा — सही पाठ कैसे हो

 

सुन्दरकाण्ड कराते समय एक आसन पर स्थिर होकर बैठना चाहिए। अत्यंत आवश्यक हो तभी जल लिया जाए, पर पार्टी जैसे माहौल में बीच-बीच में शरबत-चाय लेकर घूमना उचित नहीं । यह एक पवित्र अनुष्ठान है, उत्सव नहीं ।
अतः सभी से विनम्र निवेदन है — अगली बार जब भी सुन्दरकाण्ड पाठ की बुकिंग करें, तो मंडली से यह भी पूछें कि पाठ अर्थ सहित होगा या नहीं, और मर्यादा का पालन होगा या नहीं ।

अपनी संस्कृति और धर्म का उपहास न बनाएं — सुन्दरकाण्ड मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि इसमें स्वयं श्री हनुमान जी का पवित्र चरित्र समाहित है ।

जय सियाराम 🙏

जय श्री सीता राम हनुमान जी महाराज की

 

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